इन नदियों जंगलों के
हम रहते है
सहारा
जहाँ सूरज की
पहली किरण की
सौगात मिलती है
जहाँ पक्षिओं की मधुर
धुन कितनी प्यारी
लगती है
पत्थर में भी
हर जगह जहाँ
भगवान बसे रहते
हैं
उसे अब हमारा
देवभूमि उत्तराखंड कहते
है
फिर क्यों आज हर
खेत खलियान बंजर
पड़े हैं
यहाँ अनमोल खजाना फिर
भी क्यों भाग
पड़े हैं
रोक लो हर
तूफानों को जो
उड़ने को मजबूर
हुए
न लालच में
पडो सब एकदिन
खली हाथ ही
गए
एक नजर हर
तरफ जाकर देखो
स्वर्ग जैसा मिलेगा
बढ़ो अपने छेत्र
की ओर हर
तरफ अपना ही
दिखेगा
गढ़ मित्र परिषद् से
छेत्र उम्मीद अब
जगी है
विकास की ओर
बढ़ेंगेअब सबकोआसलगी है
जय देवभूमि उत्तराखंड
जय पट्टी खाटली
दानसिंह रावत







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