गाय पालने के फायदे
एक द्वीप था .वहां
के लोग गाय
के बारे में
नहीं जानते थे
न ही उसका
नाम सुना
था ,पहले ज़माने
में व्यापारी दूसरे
देशों में जा
कर व्यापार करते थे
.तो एक चतुर
व्यापारी उस द्वीप
में एक गाय
लेकर गया . महल
के कुछ दूरी
पर उसने सैनिकों को कहा
एक व्यापारी आया
है चलता
फिरता पेड लाया
है राजा को
उस बिचित्र पेड
को देखने गया
,व्यापारी को कहा
कैसा पेड़ उसकी
खूबिया बताओ , मैं खरीद
लूँगा ,जितना धन,असरफियाँ,
आदि चाहिए
दूंगा पर मुझे संतुस्ट
करना पड़ेगा .ठीक
है व्यापारी बोला
मैं रोज आपकेलिए उसके दिए
स्वादिष्ठ .ताज़ा माल
सुबह -२ लाऊंगा,राजा दरबार
में चला .दूसरे
दिन व्यापारी दूध
ले गया राजा ने
पिया और प्रषन्न
हुआ अशर्फियाँ दी
रोज व्यापारी
बारी -२ से
कभी दूध ,मक्कन
.दही कुछ दिन
तक उपहार जैसा
देता रहा
वह माला माल
हो गया ,फिर
जाने की इजाजत
मांगी ,,राजा ने
कहा और जितना
धन दौलत चाहिए
ले जाओ पर
उस बृक्ष को
यहीं छोड़ जाना
.ब्यापारी खुश हुआ
उसने कहा जो
आप दो ख़ुशी
से ले जाऊंगा
,और राजा ने
बहुत और धन
दिया व्यापारी चला
गया ,फिर राजा
ने सैनिकों को
कहा जाओ उस
पेड की देखभाल
करो और जो
भी दे उसे ताज़ा
मेरे पास ले
आना ,सैनिक सोने के
बर्तन ले कर
ले गए देखते
रहे कब फल
दे , अचानक गाय
ने मूत्र किया ,सैनिकों ने पात्र
लगाया और
उस मूत्र को
उसी समय राजा
के पास ले
गए राजा
खुस हुआ .कहा
आजतक व्यापारी ने
इतना गरम और
नया पदार्थ नहीं
दिया ,सूंघ तो बदबू
फिर सोचा चख
कर देखूं चख
तो बोला कड़वी
पदार्थ है ,कोई
बात नहीं जो
मीठा देता है
कड़वा भी दे
सकता , उसी समय
दूसरा सैनिक भी सोने
के बर्तन में
गरमा-गरम गोवर
लेकर आया ,राजा
ने देखा और
कहा अरे यह
भी नई चीज
है उसको चखा
और तत्काल थू-२ करने
लगा और गुस्से
से सैनिकों
को कहा उसने हमें
धोखा दिया उस
बृक्ष को
साथ ले गया
और हमें नकली
बृक्ष दे गया
,ढूँढ़ो उसे दूर
नहीं गया होगा
.सैनिक चारों और फ़ैल गए फिर
उसे पकड़
कर राजा के
पास ले गए
और उसे कहा
मुझे धोखा
दिया अब परिणाम
भी भुक्तेगा ,व्यापारी
बोला मैंने धोखा
नहीं दिया ,आपके आदमी उससे
फल लेना
नहीं जानते ,मैं
उनको फल लेने
की बिधि बताऊंगा
फिर राजा संतुस्ट हो गया
और दूध
.दही मक्कन खाने
का लुप्त उठाने
लगा कर्मचारी
बोले राजन ,कैसा
बिचित्र पेड है
एक से इतना हमें
भी राज्य की
भलाई के लिए
और पेड लेना चाहिए
,राजा बोला जरूर-२ । तात्पर्य है मेहनत लगन बुद्धि जिसके पास हो कुछ भी कर सकता है , दानसिंह रावत। ग्राम नऊ