कितना बदल गया गढ़वाल
दगडियो न मि पत्रकार.न नेता .न कवि और न साहित्यकार छु एक तुमारु तरह उत्तराखंडी छु. लोग बोल्दी गढ़वाल बदल गय. सुनिक खुशी भी हूंद और हैंसी भी , कि कै म तरक्की काई,कुछ बयंग,कुछ विचार ,कुछ सोच्नय बात छी जु प्रकट करुनु छु , आज घरबार बंजर हो गी, गाउँ सुनशान छी, चखुला तक गायब होगी ,सरकार बोल्दी बहुत योजना चलना छी गाउँ म सड़क टूट्या छी ,कच्छी २० साल बै की छी छोटी गाड़ी चलदी पर खतरा भंडया रैन्द, बँकोंम पैसा नई रैंदा ,हॉस्पिटल म एक्सरा,जाँच या दवाई तक नि रैंदा ,बंगली डॉ कु मज़ा जणू द्यालु खान टी छींछ जीना कु , यत ह्वै छोटी बात ,अब बड़ी बात च की पैली ब्वारी ,बेटी छोटा बड़ा ज्या मिलनदु छै .मंडवा की रोटी ,चटनी , झुंगर , कंडली कु भुजी ,कौनी , भइली ,सब साफ़ पर अब गिछा त्याड़ा कार दिन्दी,बदल गय न पहाड़ ,और सुना , ब्वारी धोती बिलोज पैनिन छाया अब सूट , लहंगा .जीन्स ,धोती त गायब हो गी . खान म टोस्ट रस कण बोल्दी , चौमिन ,सौस. चिकन , मटन चाहे कटक मैंगू च पर हरी भुजी नि खानु, सब छवाड़ा अब बतांदु नै बात , घर म च जु लड़का लड़की ऊँक ब्यो ह्वाल त पैली मांग मेथाइ शहर लिजावां मि नि रणउछु यख नथर ,समझी गवा आप , चाहे झुगी म या छोटी कुठारे म रहू, फिर कुछ मैना बाद बच्चा फिर बडू ह्वालु त स्कूल यखी पढ़ाना है उ बिचारु क्या करलु मनन कार मजबूर ,जमना की डर कखि भागी न जाली या आरोप लगा ड्याली की दहेज़ मंगणु छ .जनानियों की पुलिस जल्दी सुनन ,त भाइयो कंक्याइ गढ़वाल उन्नति करालु सभ्य यखी आ जाला त , सालों बकी इ हुनुछ ,अब त सुनन्दवा की वैकि लड़की वेदगड़ भागी गयी ,चाहि २० -२५ साल बड़ू या छोटू च ,पैली भी जम्नु छै , बिगर बर कु बीओली आ जांदी छाई ,बर जु फ़ौज म रैंदा छाई लगन बक्त छुटि नई मिलंद छाई , गाउँ की इज्जत कु वास्त हूंद छाय. आज हमरु उत्तराखंड कु कतका डॉ छी क्या अपर गाउँ म नई जा सकदा,सरकारी अफसर छी नै योजना बना सकदी ,एक माली भी ह्वालु शहर म रिटायर बाद बागवान बना सकद पर अफशोस सहर ही हवा ,पैसों का घमंड म भूल गी की कभी हमल ,हमरु माँ बाप न कंकय पलावा, जु भी रिटायर ह्वै शहर कु रै गय, सभील य दुनिया मैक चल जाँड अपर भाई ,माँ बाप ,समाज कण कुछ कर जालु त नाम और दुआ त मिलालु धन .दौलत कभी साथ नि जांद, स्वाचा अपरू पहाड़ कन
दोस्तों नाराज न हुयां ,कैथी बुर भी लाग्नु ह्वालु की हमारी आज़ादी कु बट्टा लागनुछ पर सच्चाई कड़वी हूंद यह म्यर बिचार छी
जय उत्तराखंड जय पहाड़
दगडियो न मि पत्रकार.न नेता .न कवि और न साहित्यकार छु एक तुमारु तरह उत्तराखंडी छु. लोग बोल्दी गढ़वाल बदल गय. सुनिक खुशी भी हूंद और हैंसी भी , कि कै म तरक्की काई,कुछ बयंग,कुछ विचार ,कुछ सोच्नय बात छी जु प्रकट करुनु छु , आज घरबार बंजर हो गी, गाउँ सुनशान छी, चखुला तक गायब होगी ,सरकार बोल्दी बहुत योजना चलना छी गाउँ म सड़क टूट्या छी ,कच्छी २० साल बै की छी छोटी गाड़ी चलदी पर खतरा भंडया रैन्द, बँकोंम पैसा नई रैंदा ,हॉस्पिटल म एक्सरा,जाँच या दवाई तक नि रैंदा ,बंगली डॉ कु मज़ा जणू द्यालु खान टी छींछ जीना कु , यत ह्वै छोटी बात ,अब बड़ी बात च की पैली ब्वारी ,बेटी छोटा बड़ा ज्या मिलनदु छै .मंडवा की रोटी ,चटनी , झुंगर , कंडली कु भुजी ,कौनी , भइली ,सब साफ़ पर अब गिछा त्याड़ा कार दिन्दी,बदल गय न पहाड़ ,और सुना , ब्वारी धोती बिलोज पैनिन छाया अब सूट , लहंगा .जीन्स ,धोती त गायब हो गी . खान म टोस्ट रस कण बोल्दी , चौमिन ,सौस. चिकन , मटन चाहे कटक मैंगू च पर हरी भुजी नि खानु, सब छवाड़ा अब बतांदु नै बात , घर म च जु लड़का लड़की ऊँक ब्यो ह्वाल त पैली मांग मेथाइ शहर लिजावां मि नि रणउछु यख नथर ,समझी गवा आप , चाहे झुगी म या छोटी कुठारे म रहू, फिर कुछ मैना बाद बच्चा फिर बडू ह्वालु त स्कूल यखी पढ़ाना है उ बिचारु क्या करलु मनन कार मजबूर ,जमना की डर कखि भागी न जाली या आरोप लगा ड्याली की दहेज़ मंगणु छ .जनानियों की पुलिस जल्दी सुनन ,त भाइयो कंक्याइ गढ़वाल उन्नति करालु सभ्य यखी आ जाला त , सालों बकी इ हुनुछ ,अब त सुनन्दवा की वैकि लड़की वेदगड़ भागी गयी ,चाहि २० -२५ साल बड़ू या छोटू च ,पैली भी जम्नु छै , बिगर बर कु बीओली आ जांदी छाई ,बर जु फ़ौज म रैंदा छाई लगन बक्त छुटि नई मिलंद छाई , गाउँ की इज्जत कु वास्त हूंद छाय. आज हमरु उत्तराखंड कु कतका डॉ छी क्या अपर गाउँ म नई जा सकदा,सरकारी अफसर छी नै योजना बना सकदी ,एक माली भी ह्वालु शहर म रिटायर बाद बागवान बना सकद पर अफशोस सहर ही हवा ,पैसों का घमंड म भूल गी की कभी हमल ,हमरु माँ बाप न कंकय पलावा, जु भी रिटायर ह्वै शहर कु रै गय, सभील य दुनिया मैक चल जाँड अपर भाई ,माँ बाप ,समाज कण कुछ कर जालु त नाम और दुआ त मिलालु धन .दौलत कभी साथ नि जांद, स्वाचा अपरू पहाड़ कन
दोस्तों नाराज न हुयां ,कैथी बुर भी लाग्नु ह्वालु की हमारी आज़ादी कु बट्टा लागनुछ पर सच्चाई कड़वी हूंद यह म्यर बिचार छी
जय उत्तराखंड जय पहाड़