मंगलवार, 22 नवंबर 2016

कितना बदल गया गढ़वाल

कितना बदल गया गढ़वाल
दगडियो न मि  पत्रकार.न नेता .न कवि और न साहित्यकार छु एक तुमारु तरह उत्तराखंडी छु. लोग बोल्दी गढ़वाल बदल गय. सुनिक खुशी भी हूंद और हैंसी भी , कि कै म तरक्की काई,कुछ बयंग,कुछ विचार ,कुछ सोच्नय बात छी जु प्रकट करुनु छु , आज  घरबार बंजर हो गी, गाउँ  सुनशान छी, चखुला तक गायब होगी ,सरकार बोल्दी  बहुत योजना चलना छी गाउँ म  सड़क टूट्या छी ,कच्छी २० साल बै की छी  छोटी गाड़ी चलदी पर  खतरा भंडया रैन्द, बँकोंम पैसा नई रैंदा ,हॉस्पिटल म  एक्सरा,जाँच या दवाई तक नि  रैंदा ,बंगली डॉ कु मज़ा जणू  द्यालु खान टी छींछ जीना कु , यत ह्वै छोटी बात ,अब बड़ी बात च की पैली ब्वारी ,बेटी छोटा बड़ा ज्या मिलनदु छै .मंडवा की रोटी ,चटनी , झुंगर , कंडली कु  भुजी ,कौनी , भइली ,सब साफ़ पर अब गिछा त्याड़ा कार दिन्दी,बदल गय न पहाड़ ,और सुना , ब्वारी धोती बिलोज  पैनिन छाया अब सूट , लहंगा .जीन्स ,धोती त गायब हो गी . खान म टोस्ट रस कण बोल्दी , चौमिन ,सौस. चिकन  , मटन चाहे  कटक मैंगू च पर हरी भुजी नि खानु, सब छवाड़ा अब बतांदु नै बात , घर म च  जु लड़का  लड़की ऊँक ब्यो ह्वाल त पैली मांग मेथाइ  शहर लिजावां मि नि रणउछु यख  नथर ,समझी गवा आप , चाहे  झुगी म या  छोटी कुठारे म रहू, फिर कुछ मैना बाद बच्चा  फिर बडू ह्वालु त स्कूल यखी पढ़ाना है उ बिचारु क्या करलु  मनन  कार मजबूर ,जमना की डर कखि भागी न जाली या आरोप लगा ड्याली की दहेज़ मंगणु छ .जनानियों की  पुलिस जल्दी सुनन ,त भाइयो कंक्याइ गढ़वाल उन्नति करालु सभ्य यखी आ जाला त ,  सालों बकी इ हुनुछ ,अब त सुनन्दवा की वैकि लड़की वेदगड़ भागी गयी ,चाहि २० -२५ साल बड़ू या छोटू च ,पैली भी जम्नु छै , बिगर बर कु बीओली आ जांदी छाई ,बर जु फ़ौज म रैंदा छाई लगन बक्त छुटि नई मिलंद छाई , गाउँ की इज्जत कु वास्त  हूंद छाय. आज हमरु उत्तराखंड कु कतका डॉ छी क्या अपर गाउँ म  नई जा सकदा,सरकारी अफसर छी नै योजना बना सकदी ,एक  माली  भी ह्वालु  शहर म रिटायर बाद बागवान बना सकद पर   अफशोस  सहर ही हवा ,पैसों का घमंड म भूल गी की कभी हमल ,हमरु माँ बाप न कंकय  पलावा, जु भी रिटायर ह्वै शहर कु रै गय, सभील य दुनिया मैक चल जाँड अपर भाई ,माँ बाप ,समाज कण कुछ कर जालु  त नाम और दुआ त मिलालु धन .दौलत कभी  साथ नि जांद, स्वाचा अपरू पहाड़ कन
 दोस्तों नाराज न हुयां ,कैथी बुर भी लाग्नु  ह्वालु की हमारी आज़ादी कु बट्टा लागनुछ पर सच्चाई कड़वी हूंद यह म्यर बिचार छी
जय उत्तराखंड  जय पहाड़