बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

घौर बार छोड़िक अवा हम नोनुकू पीछन्या

                                       मन की पीड़ा








                                                शुभ
  दोफरी दगडिओ . आज पहाड़ पलाइन सब से बड़ी समस्या हो गए कीलय की  हम प्रदेश   छावा स्वाच हमरु उत्तराखंड बनालु हमरु राजधानी गैरसैण होली जख बाटी हमरु  पहाड़ को विकास हवालु . घार   बुना का  हमारा बच्चा यखी नौकरी कराला क्या पता छै आज अप्रु पहाड़ खाली  हवालु और हम चुप छावा कीलय की जीण सभी ल वख कुछ विकास हुन्द  किल्य  आंदा लोग .आज भी आस की राजधानी  गैरसैण जांदी लोग अप्रु घरो लौट जांदा एक वैल एक जुट होइकी गैरसैण राजधानी की मांग सब्या कारा और  कनि कैकी भी अपरा भाई बन्दौं को साथ छाव . मजबूरी आई की जो  निजा कंदा  घार मन क्या ख्याल  आनद   एक छोटी सी लाइन ........

घौर बार छोड़िक अवा हम नोनुकू पीछन्या
की  हमारी माया छै सोची नि छै अग्न्या
नाती नातिनों कु छै लोभ माया छाई  इन्नी
देखि निछ पीछन्य चैली गवा जना तन्नी
गौर गठियार छ्वाड़ हमल छोड़ी घर बार
उजिडीक कख गए गओली हमरु  तिबार
गौं ग्ल्यू की याद आणि यख सोचना रिन्दा
मन चखुली बियोँ कन घोर आंदा
दूर प्रदेश छवा गौं अब नि सकन्दा
हमरु बोलिउ हम ही राइ कुई नि सुन्दा
जग्गों जगौं एन्नी रोड, बाटु टूटी ग्याई
पैदल कु पुरनु बाटू अब सब्या भूली गई
पछतानु छू अब पहाड़ मिसे हमेशा कु अब छुटी ग्यी
बुढ्या पुराणोँ की बसई अब गौं तिबरी भी रूठी ग्यी
राइ तिबरी राइ अब चौखट डिंडोली
जख द्याखा बस अब फूली कंडाली

दानसिंह रावत 
जय रशिया महादेव 
जय  देवभूमि उत्तराखंड 

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

कितना सूंदर पट्टी खाटली मल्ली हमारा,









कितना
सूंदर पट्टी खाटली मल्ली  हमारा,
इन नदियों जंगलों के हम रहते है सहारा
जहाँ सूरज की पहली किरण की सौगात मिलती है
जहाँ पक्षिओं की मधुर धुन कितनी प्यारी लगती है   
पत्थर में भी हर जगह जहाँ भगवान बसे रहते हैं
उसे अब हमारा देवभूमि  उत्तराखंड  कहते है
फिर क्यों आज हर खेत खलियान बंजर पड़े हैं
यहाँ अनमोल खजाना फिर भी क्यों भाग पड़े हैं
रोक लो हर तूफानों को जो उड़ने को मजबूर हुए
लालच में पडो सब एकदिन खली हाथ ही गए
एक नजर हर तरफ जाकर देखो स्वर्ग जैसा मिलेगा
बढ़ो अपने छेत्र की ओर हर तरफ अपना ही दिखेगा 
गढ़ मित्र परिषद् से छेत्र उम्मीद अब जगी है
विकास की ओर बढ़ेंगेअब सबकोआसलगी है

जय देवभूमि  उत्तराखंड जय पट्टी खाटली 
दानसिंह रावत


गढ़ मित्र परिषद्

हर तरफ थी जहाँ खुशिया उस देवभूमि को सबने छोड़ दिया 
उन अपनों की उम्मीदों को हमने आज बीरान सा बना दिया 
क्यों चले पहाड़ से क्या मिलती है हमें खुशिया शहर में 
न रहता है यहाँ कोई अपना फिर भी रहते हो उम्मीदों में 
भागते फिरे आसियाना को मिले एक छोटा महख़ाना
फैला घर सब का बिखर टूट गया तो फिर न पछताना 
धन दौलत बहुतों का होगा पागलो क्या काम आएगा 
बक्त है न करो तुम लालच सब कुछ यही रह जाएगा
चलो जन्म भूमि ओर एक नया पट्टी खाटली बनाना है 
जहाँ बहे विकास की नदियां वक्त है सबको बताना है 
हर छेत्र के नव युवक जागो एक नया अलख जगाओ 
हम भी छेत्र को बीरन न होने देंगे सब कोयह बताओ 
हमारे छेत्र की एकता थी ऒर सदा सदा बना रहेगा
गढ़मित्र परिषद्के तले बढे हम ध्य विकास रहेगा

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

जाने कैसे ये लोग है


जाने कैसे ये लोग है जिनको हमने ताज दिया ,
हमने गैरसैणऔर विकास माँगा पलायन दिया .
कितनों ने चोट खाया कितनों अपनी जान गवां दिया,
हमने हरियाली.माँगा आज हर जगह खंडर बना दिया .
बिछड़ गया हर साथी देकरपल दो पल का साथ ,
किसको फ़ुरसत है जो पकडे उनपरिवारों का हाथ.
जाने कैसे ये लोग है जिनको हमने ताज दिया ,
हमने ..........
खुशियों की आस किया गम का आज दर्द मिला,
आंखे पथरा गई कमरें झुक गई इंसाफ मिला .
बोझ रह गया शहीदों का जिन्होंने शहादत दिया ,
शर्म से नजरे झुकजाती हैजो हमने कुछ किया .
पिछड़ गया अब देवभूमि अब तुम्हे कुछ करना है,
चलो बढ़ो अपने - छेत्र को नई अलख जगाना है .
देखो कैसे आज गौं सुनसान हर खेत बंजर पड़े हैं ,
हर नदी पेड,डाली जंगल तुम्हारे इंतजारमें खड़े हैं .
जाने कैसे ये लोग है जिनको हमने ताज दिया ,
हमने ...............
जीना इसको नहीं कहते जो बस अपनों के लिए जिए,
कभी अपने गौं के गरीब असहाय की मदद  कीजिये .
देव भूमि की बदहाली को खुशहाली में बदल दीजिये,
अपने - छेत्र की हर विकास की लहर पहुंचा दीजिये
धन दौलत खूब कमाया सब ने पर मन की शांति नहीं,
किस्मत का खेल कब पलटे फिर आना है सब को यही.
जाने कैसे ये लोग है जिनको हमने ताज दिया ,
हमने ...............
 जय देवभूमि उत्तराखंड .जय पट्टी खाटली मल्ली।                   दानसिंह रावत 





मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

बढे मिल कर कदम तो तूफानों से भी कोई डर नहीं



बढे मिल कर कदम तो तूफानों से भी कोई  डर  नहीं
मन में विश्वास हो तो कोई काम होता मुश्किल नहीं
बढ़ो खाटली मल्ली लोगो अब तुम को ही आगे आना  है
न रहा विश्वास किसी पर मुकान हासिल तुमको करना है
अनेकता से एकता का सन्देश सब को बताना है
खाटली मल्ली में विकास का परचम लहराना है
कहते.रोते रहे  बिना उपचार के चल दिए अपने
बरसों से पाले हर एक ने विकास के हर सपने 
नयी उमंग के साथ साकार करो सब अपना  सपना
सब देख लिया समझ लिया नेता नहीं होता अपना
सब ने देखा वर्षों से  इस छेत्र में कहीं विकास नहीं
सामने नदी बहे  जहाँ फिर भी छेत्र में पानी  नहीं
नमन करे उन शहीदों को जिन्होंने उत्तराखंड दिया
दुःख भी है माँगा था वीरों ने गैरसैण ,देहरादून दिया
समय की पुकार है सब को शपथ अब यह लेना है
विकास की लहर चले  हर  गांवों में।                                    खाटली मण्डल की पहचान बनाना है 
ब्लॉक हो या पट्टी.छेत्र  हर जगह एक साथ आना है
हर छेत्र हो खुशहाली मन की दिवाली खुशियां लाना है
हर एक का सपना साकार हो ऐसा छेत्र बनाना है
जिन्होने केवल सपना दिखाए उनको भी बताना है
चलो साथ बढ़ाओ हाथ  सपना साकार करना है
अपने छेत्र को उन्नति की ओर  अब बढ़ाना है
जय उत्तराखंड  देव भूमि पहाड़ .                                            जय खाटली रशिया महादेव 
जय खाटली विकास मण्डल।                                            दानसिंह रावत  धौड़िया रावत (नऊ ,)

शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

बस राजधानी हो गैरसैण उत्तराखंड

बस राजधानी हो  गैरसैण उत्तराखंड 

चले हम गैरसैण प्यारे  पहाड़ी साथिओ
अब रुके न कदम तुम्हारे  मेरे  साथिओ
सांस चलती रहे  नब्ज चाहे रूकती रहे 
बढ़ते जाये हर दम रुक न पाए एक कदम
अब न पाले गैरसैण के दुश्मन एक भी भरम
सर पहाड़ का हम अब  झुकने दिंगे नहीं 
बिन गैरसैण राजधानी के बात करंगे नहीं

जिन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज रोज आती नहीं
बैठे रहे लुटता देखते रहे बस सोचते रहे
एक डोर  बँधो गैरसैण के सिवा कुछ नहीं
आज देव भूमि रोज तुम्हे पुकार रहा है
बीरगति आंदोलनकारी करहा रहा है
किसके लिए हमने जान निछावर कर दी
बेमानोँ के आगे अपनों ने क्या सर झुका दी
बीर प्रतापसिंह, गोपीचंद, धर्मानंद, रामपाल
भगवाल सिंह  को तड़पाकर खटीमा में भुना
हर पहाड़ के घर मातम औरपहाड़ लगा सूना
आज भी जालिम दुस्ससी घूम रहे है
देखो आज भी पहाड़ को ललकार रहे है

लेना है हर कीमत पर अब गैरसैण 
आज पहाड़  बनी है बीरान साथियों

चले हम गैरसैण प्यारे  पहाड़ी साथिओ
अब रुके न कदम तुम्हारे  मेरे  साथिओ
राह कुर्बानियों की ना वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नये काफ़िले
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
जिन्दगी मौत से मिल रही है गले
बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियों
अब तुम्हारे हवाले उत्तराखंड साथिओ
खेच दो लकीर राजधानी गैरसैण बनाएँगे
जान भी गई तो उसे हासिल करके रहेंगे
लूट न सके ये पहाड़ को यतन करो साथिओ
बक्त है कफ़न बांध लो अब मेरे साथिओ
चले हम गैरसैण प्यारे  पहाड़ी साथिओ
अब रुके न कदम तुम्हारे  मेरे  साथिओ