हाई री कॉरोना महामारी। तुझ से सारी है दुनिया हारी। दुनिया के लिए कर दी दुखदाई । हाई री कॉरोना कैसी तू महामारी। जग भाग रहा , सिमट रहा आंखे पथरा रही। कितने घर बर्बाद कर लिए अब तो तू ठहर जा।भाग जा। ईश्वर भी देख रहा तमाशा कितने और धरती से उठवाएगा। भूखे प्यासी हैं भक्त तेरे उन्हें थोड़ा तरस दिखा जा। यतन करे हर कोई मेरा न जाए कोई इस दुनिया से । घर में बंधक सा है हर कोई। तूने क्या कर डाला। प्रभु जोजहां ठिठर गया वहां मौत का तांडव है हर जहां। अपनों से दूर हुए एक दूजे से प्यार भी न जता पाए । कैसा तांडव है कॉरोना का हाए। भूख लगी भक्तों को । तन मन भी तूने बेहाल किए । क्या खता हो गई। जो तू इतना दर्द दिए। जीवनदिया तो जीने भी दे, रूह कांप जाती है जब बिलखते बच्चों को देखो। अपने अपनों से बिछड़े है इस को रोको । न रो पा रहा है बेजान शरीर के समुख आशु पी रहे हैं। देख भगवान तेरे भक्त कैसे जी रहे है । । हाई री भगवान कैसी कॉरोना महामारी है। तूही कुछ कर को तूने यह बीमारी फैलाई । हाई री कैसी कॉरोना महामारी है
रविवार, 19 अप्रैल 2020
शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020
ईश्वर तुम क्या रंग दिखाते हो
ईश्वर मनुष्य की कितनी बार परीक्षा लेगा ।कभी बाढ़।कभी भूकंप तो आज सारे विश्व में एक घातक बीमारी का प्रकोप जिसे कोरोना का नाम दिया गया है।यह चीन से शुरू हुआ ।क्या एक देश ने अपनी धाक के लिए कोई विषैला परीक्षण किया या कुदरती देन है समझ मे नहीं आ रहा किसी को । भगवान । हंसते घरों को उजाड़ रहे हो ।लोगों में दहशत है ।अपनी आंखों से देख रहे है बिलखते मजदूरों को जो एक वक्त की रोटी मुश्किल से खा पाते है बड़े लोग सरकारी लोग जिनका सहारा है वेतन व नेता तो जनता को लूट कर खा लेगी ।उनके नाम से घर भी नहीं जा पा रहे है कि मारना है तो अपनों के पास मरे पर ओ भी न कर पा रहे है खाना नहीं मिलेगा तो कितने अनाथ बन जाएंगे बाढ़।भूकंप के समय देखा जो दृश्य अभी भी घूम रहे है आंखों में कहीं वैसा न हो ।ईश्वर गरीबों पर तरस खाओ ।इस महामारी से बचाओ ।
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