शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

शुभ

म्यारा दगड़ियो कुछ सच्चाई छी।                                               जु आप लोगों  कु समणी रखनु छु                                             गलती माफ़ करिया भाई लोगो।                                              
हे जमनु  कनु तेरु आज इन  रीति च
कुई करोड़पति छिं कैम खाणा को नीच 
कैकु करोड़ों को बांग्ला च कैकु छप्पर भी नीच 
हे .जमनु................
कुई लेंगा चुनरी जींस म ठुमका लगाणु च
कैम एक चिरी कपडा और धोती नि च
हे जमनु..........
कुई  होटल म मैंगू खाना ,कुई  पीजा खानुुुच 
कुई धुप म तापिकी भूख अर प्यासल मोरी जांद 
हे जमनु.............
कुई मखमल को बिस्तर म ठाट करणु च
कैथे खााटूल बिछाना जमीन भी नि मिलणी च
हे जमनु ..........
कुई लोगों को पैसों ल घर अप्रु भोरनु च
कुई एक -एक पाई कण आज तडपनुच
हे  जमनु.............
कुई देश विदेश  मस्ती कण घुमनू च
कैकू घार ब्वै बूब्बा मिलणा कण तरसुनूच
हे ......
नेता कखी बेकूब बनाना छी                                                 दगड़ी अपरा भी बेकूब बनाना ची
माँ बापू कु जु कमऊ वे थै ही छीनना ची
हे जमनु........                                                               दानसिंह रावत 
            ।










शनिवार, 24 अगस्त 2019

काश ओ दिन लौट कर आते

                          काश ओ दिन लौट कर आते 
बचपन की यादें अक्सर याद आ  जाते  हैं
चलना सखी जब से ओ दिन याद आ जाते हैं
रोना ।हंसना रूठ जाना  कभी कभी अपनों से
उनका मनाना कभी मारना प्यारा लगता था

दा

थोड़ा बड़े क्या हुए शैतानी सुरु हो जाती थी
परेशां जब सब हो जाते ।गाली भी प्यारी थी
बचपन  की.........................
स्कूल कॉलेज की उम्र भी क्या गजब होती है
कितने दोस्त ।और दुश्मन बन जाते थे
इसमें भी प्यार होता था फिर गले लग जाते थे
याद करू उन लम्हों को आँखों से आँशु निकल जाते हैं
बक्चपन की यादें.................
विद्या एक नई दिशा का पैगाम देता है
बस दुःख इस बात है होता है जिससे लगाव होता है
अपने अपने भाग्य की खोज में निकल जाता है
बचपन अपना पन दिखता है सिखाता है
पर सच  मानो दिल पर एक घाव सा दे जाता है
बचपन .........................................
फिरू हर जगह पर ओ दिन फिर लौट कर शायद न आएगा
बस आश लगाए बैठते है बिछड़ा साथी कभी मिल जाएगा
बचपन ........................
 दान सिंह  धौड़िया रावत
उत्तराखण वाले

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यादे भी क्या होती है



यादे भी क्या होती है
जब कभी अपने यादों का पिटारा टटोलता हूँ
तो मुझे  ओ प्यारे दोस्त बहुत याद आते हैं 
ओ बचपन याद आता है ओ कहानियाँ याद आते हैं
जी गौं में कदम रहता हूँ हर घरों से ओ यादें याद आते हैं
घरों के ओ पौधे ढूंढ़ता हूँ जो कभी कुचल जाते थे
उन लोगों को ढूंढ़ता हूँ जो कभी डंडे लेकर पीछे भागते थे
उच्ची आवाज देकर घर में मेरी शिकायत करते थे
भूल से गए कुछ ।छोड़ गए आईशाना कुछ यादे ही रह गई
जब कभी गुजरों इन गलिओं से सुनशान या खंडर रह गई
कभी चले गौं कोई तो बच्चों की ख़ुशी का ठिकाना न होता था
आज समय ने करवट बदला अब बस केवल यादें ही रह गई
जब कभी अपने यादों का ।।।।।

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

सुनहरी यादें






आज पहाड़  से पलायन के कारण गाउं सूने पड़े हैं खेती जो लहराती थी आज बंजर हो गई है पर कुछ लोगों को छोड़कर आज भी अपने ईष्ट देव देवताओं पर अटूट विश्वास है जो मै भी मानता हूं। नरांकार देव की सबसे ज्यादा पूजा होती हैजो ईस्ट देव है अधिकतर पहाड़ में ।उसके बाद नर्सिंग देव। ग्राम देवी जिनका अपने अपने तरीके से पूजा की जाती है । पौड़ी गढ़वाल जिले के रशिया महादेव छेत्र के धौड़ीया रावत परिवार जो 4.5 गाउं में बसे है उनका देव पूजा बड़ी धूमधाम से होती है आसपास के सभी ग्रामों को निमंत्रण दिया जाता है जिसमें छेत्र वासी अपनी उपस्तिथि से कार्य में हाथ बंटाते है इस छेत्र की एकता काबिले तारीफ है सभी देवों से आशीर्वाद लेकर भोजन करते है । धौडिय समाज ने कहते है सबसे पहले वास किया ।शिव के प्रति उनका अटूट विश्वास रहता है जो नरंग कार देव के रूप में पूजे जाते है कहते है रशिया महादेव की स्थापना सदियों पुराना है किसी  पूर्वज को देव ने दर्शन दिए उस स्थान पर और ओर वहां खुदाई करने को कहा । जहां शिव लिंग मिला उसके बाद  मंदिर में को भी भक्त आता उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होने लगी कहते हैजब गोरखो ने अत्याचार किया उस समय देवी देवताओं ने लोगो को सचेत किया की छुप जाओ ।तब से ग्राम देवताओं को मानने लगे ग्राम वासी  पहाड़ की अनेक कहानियां है पर सक्षार्थ न होने से यहां की संस्कृति। सच्ची कहानियों पर  कोई सोध भी न हो सका । आज हर तरफ मंदिर ही नजर आएंगे आपको इतनी आस्था है देवों पर नहीं तो इन पहाड़ों पर कौन बसता जो गाउं से जुड़ा होगा वह देवों का चमत्कार देखा होगा और महसूस किया होगा ।सच में हमारा पहाड़ देव भूमि है ।उसे बचाए रखना अपना कर्तव्य समझे सभी तो सब कार्य शुभ हिहुंगे कभी कहते थे किसी घर पर ताला नहीं लगता था हर घर में देवों का वास है पर अब घर ही नहीं तो वास कहां से होगा सोचना होगा नहीं तो देव भूमि के बदले रैत भूमि न बन जाए ।सोचना होगा देवभूमि की पहचान ग्रामों की पहचान जय उत्तराखंड देव जय देव भूमि जय उत्तराखंड रशिया महादेव





शनिवार, 17 अगस्त 2019

रसिया नदी की खूबसूरती





हमारा उत्तराखंड खूबसूरत पहाड़ों में बसा है और इसकी खूबसूरती में कलकल छलछल बहती नदियों का विशेष स्थान है।  हमारे गांव की तलहटी में भी एक खूबसूरत नदी है, यह नदी लख़ोर और रशिया नदी के संगम से बना है जिसे हम रसिया महादेव के नाम से पुकारते है अचंभित बात है कि लक्खोर नदी उवड खाबड़ करके आती है और रशिया शांत व तीव्र गति से आती है 

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

हाई हाई रे तेरो मोबाईल


शुभ दोफरी मित्रो आज  लोगों कण सबसे प्यारा क्या मोबाईल  सही ब्वाल   नै जमाना कु नै स्टायल भी जरूरी एक छोटी सी भेंट गलती माफ़ करय हो ,,,,
हाई हाई रे तेरो मोबाईल
केते रुलाईल कैथे हंसाइल
हाई हाई रे मोबाईल .....
कुई भितरा कु कोण छुपिओं
कुई बाथरूम लुकिओन
कैलू रोटी जळणु  
कैकु सब्जी फुकनी
हाई हाई रे तेरो मोबाईल .......
कुई गेम खेलणा मस्त  छी 
कुई छोरी ,छ्वारा पटाना  छी
बूढ़ी बुड्या पीठ करिक मुख छुपाना छी
खाना कु बदलू लीड अब  चापना छी 
 हाई हाई ......
कैकु आव भगत होनी
कैकई खेर खबर होनी
कोई कैकु  यख जाणु
कुई कैथे घर बुलानु
हाई हाई ...........
रिस्ता नाता भूली सब  गईं
मन से भी  अब दूर होइ गईं
हाई हाई रे मोबाईल -......
 जय हो मोबाईल महाराज की