आज पहाड़ से पलायन के कारण गाउं सूने पड़े हैं खेती जो लहराती थी आज बंजर हो गई है पर कुछ लोगों को छोड़कर आज भी अपने ईष्ट देव देवताओं पर अटूट विश्वास है जो मै भी मानता हूं। नरांकार देव की सबसे ज्यादा पूजा होती हैजो ईस्ट देव है अधिकतर पहाड़ में ।उसके बाद नर्सिंग देव। ग्राम देवी जिनका अपने अपने तरीके से पूजा की जाती है । पौड़ी गढ़वाल जिले के रशिया महादेव छेत्र के धौड़ीया रावत परिवार जो 4.5 गाउं में बसे है उनका देव पूजा बड़ी धूमधाम से होती है आसपास के सभी ग्रामों को निमंत्रण दिया जाता है जिसमें छेत्र वासी अपनी उपस्तिथि से कार्य में हाथ बंटाते है इस छेत्र की एकता काबिले तारीफ है सभी देवों से आशीर्वाद लेकर भोजन करते है । धौडिय समाज ने कहते है सबसे पहले वास किया ।शिव के प्रति उनका अटूट विश्वास रहता है जो नरंग कार देव के रूप में पूजे जाते है कहते है रशिया महादेव की स्थापना सदियों पुराना है किसी पूर्वज को देव ने दर्शन दिए उस स्थान पर और ओर वहां खुदाई करने को कहा । जहां शिव लिंग मिला उसके बाद मंदिर में को भी भक्त आता उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होने लगी कहते हैजब गोरखो ने अत्याचार किया उस समय देवी देवताओं ने लोगो को सचेत किया की छुप जाओ ।तब से ग्राम देवताओं को मानने लगे ग्राम वासी पहाड़ की अनेक कहानियां है पर सक्षार्थ न होने से यहां की संस्कृति। सच्ची कहानियों पर कोई सोध भी न हो सका । आज हर तरफ मंदिर ही नजर आएंगे आपको इतनी आस्था है देवों पर नहीं तो इन पहाड़ों पर कौन बसता जो गाउं से जुड़ा होगा वह देवों का चमत्कार देखा होगा और महसूस किया होगा ।सच में हमारा पहाड़ देव भूमि है ।उसे बचाए रखना अपना कर्तव्य समझे सभी तो सब कार्य शुभ हिहुंगे कभी कहते थे किसी घर पर ताला नहीं लगता था हर घर में देवों का वास है पर अब घर ही नहीं तो वास कहां से होगा सोचना होगा नहीं तो देव भूमि के बदले रैत भूमि न बन जाए ।सोचना होगा देवभूमि की पहचान ग्रामों की पहचान जय उत्तराखंड देव जय देव भूमि जय उत्तराखंड रशिया महादेव
शुक्रवार, 23 अगस्त 2019
सुनहरी यादें
आज पहाड़ से पलायन के कारण गाउं सूने पड़े हैं खेती जो लहराती थी आज बंजर हो गई है पर कुछ लोगों को छोड़कर आज भी अपने ईष्ट देव देवताओं पर अटूट विश्वास है जो मै भी मानता हूं। नरांकार देव की सबसे ज्यादा पूजा होती हैजो ईस्ट देव है अधिकतर पहाड़ में ।उसके बाद नर्सिंग देव। ग्राम देवी जिनका अपने अपने तरीके से पूजा की जाती है । पौड़ी गढ़वाल जिले के रशिया महादेव छेत्र के धौड़ीया रावत परिवार जो 4.5 गाउं में बसे है उनका देव पूजा बड़ी धूमधाम से होती है आसपास के सभी ग्रामों को निमंत्रण दिया जाता है जिसमें छेत्र वासी अपनी उपस्तिथि से कार्य में हाथ बंटाते है इस छेत्र की एकता काबिले तारीफ है सभी देवों से आशीर्वाद लेकर भोजन करते है । धौडिय समाज ने कहते है सबसे पहले वास किया ।शिव के प्रति उनका अटूट विश्वास रहता है जो नरंग कार देव के रूप में पूजे जाते है कहते है रशिया महादेव की स्थापना सदियों पुराना है किसी पूर्वज को देव ने दर्शन दिए उस स्थान पर और ओर वहां खुदाई करने को कहा । जहां शिव लिंग मिला उसके बाद मंदिर में को भी भक्त आता उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होने लगी कहते हैजब गोरखो ने अत्याचार किया उस समय देवी देवताओं ने लोगो को सचेत किया की छुप जाओ ।तब से ग्राम देवताओं को मानने लगे ग्राम वासी पहाड़ की अनेक कहानियां है पर सक्षार्थ न होने से यहां की संस्कृति। सच्ची कहानियों पर कोई सोध भी न हो सका । आज हर तरफ मंदिर ही नजर आएंगे आपको इतनी आस्था है देवों पर नहीं तो इन पहाड़ों पर कौन बसता जो गाउं से जुड़ा होगा वह देवों का चमत्कार देखा होगा और महसूस किया होगा ।सच में हमारा पहाड़ देव भूमि है ।उसे बचाए रखना अपना कर्तव्य समझे सभी तो सब कार्य शुभ हिहुंगे कभी कहते थे किसी घर पर ताला नहीं लगता था हर घर में देवों का वास है पर अब घर ही नहीं तो वास कहां से होगा सोचना होगा नहीं तो देव भूमि के बदले रैत भूमि न बन जाए ।सोचना होगा देवभूमि की पहचान ग्रामों की पहचान जय उत्तराखंड देव जय देव भूमि जय उत्तराखंड रशिया महादेव
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