हमारे छेत्र विकास पुरुष
समाजसेवी स्वर्गीय श्री राजे
सिंह धौड़िया उर्फ महात्मा जी ग्राम
नउ खाटली मल्ली
जिला पौड़ी गढ़वाल
के निवासी जिनको
छेत्र वासी महात्मा
नाम से पुकारते
थे जिन्होंने
अपना सम्पूर्ण जीवन
ग्राम हो या
छेत्र के लिए
लगा दिया था
. मित्रो मैं
दान सिंह धौड़िया
भतीजा होने के
कारण नहीं एक
सच्चे समाजसेवक के
प्रति अपनी बात
व्यक्त कर रहा
हूँ आज अगर महापुरुष जिन्दा होते
तो हमारा छेत्र
विकास क्या हर
सुभिधाओं से परिपूर्ण
होता .दिल्ली में
खादी ग्राम उधोग
में कार्य करते
थे वहां
भी यूनियन के
सेक्टरी के पद
पर विराजमान थे
. स्टाप के बहुत
ख्याल रखते थे
.खादी में किसी
की भी
अकस्मात मृत्यु हो जाय
उसके परिवार की
हर संभव मदद
करके उन्हें उचित
न्याय दे कर
परिवार के सदस्य
को नौकरी पर
रखवाते थे बिना स्वार्थ के
मैंने देखा उनकी
हर कर्मचारी चाहे
ऑफिसर हो या
मजदूर तारीफ करता
था .परतु उनका
ध्यान छेत्र
के लिए कुछ
करने की लालसा
सदैव रहती थी
. हमेशा अपने खर्चे
से कभी लखनऊ कभी इलाहबाद. फिर देहरादून
दौड़ते रहते थे.
मैंने कितनी बार
उन्हें मना किया
की कुछ हो
जायेगा तो उनका
उत्तर रहता मरना
तो सबको एक
दिन है क्यों
न कुछ करके
मरू . आज भी
मुझे वह दिन
याद है हमारे कलिंकाधार में
१९७४-७५ में
उनकी हॉस्पिटल खोलने
की इच्छा थी
अपने सहपाठी श्री गुमान
सिंह रावत .चंद्र
सिंह रावत धोड़िया.
मनवर सिंह रानीहाट .कल्याण सिंह मंगरों
और शिव चरण
सिंह रंगलछा. राजे
सिंह (त्यागी ) जी
भोजनगर से बात
करके सरकारी
ऑफिस लखनऊ तक
दौड़ धुप करके
श्री गुमान सिंह
जी से उद्घाटन
कराया . शिक्षा के छेत्र
में भी उनका
रुझान था .हमारा
ललितपुर स्कूल जो आठवीं
तक था उसे
हाई स्कूल बनाया
फिर इण्टर को
कमरों की आवश्यकता
थी धन न
होने से परेशान थे . उन्होंने अपने मित्रो
को राजी किया
जिनमे बड़े
कारोबारी श्री अब्बास
नाम था उनका
और एक दरियागंज
में महानुभाव श्री
मरदा जी थे
उनको अपने छेत्र
में ले गए
.१० हजार रुपए
उनके द्वारा दान
स्वरूप आये जिससे
कमरे बने और
फिर इंटर कॉलेज बना
.श्री महात्मा जी
यही नहीं रुके
उन्होंने ग्वीनखाल .बीरोंखाल कॉलेजों
के लिए भी
दान दिलवाया . अपने
गौं में पंचायत
घर हो या
अन्य कार्य कुशलता
पूर्वक करते थे
. एक समय था
जब पुरे ब्लॉक
में ग्राम नउ
नंबर एक की
श्रेणी में आता
था. रावत
जी शांत प्रिय
किस्म के थे
.आज उन्ही ही
देन है हमारे
छेत्र में रोड
के जाल बिछा
.रसिया महादेव बाजार का उदय
हुआ .आज यहाँ
बैंक है उनके
प्रयासों से ही
संभव हुआ . पंरतु अफसोस भी है बैंक उनके रहते दो कर्मचारियों द्वारा कुछ चला भी परन्तु उनके बैकुंडधाम में जाने से आज बैंक बंद पड़ा है, श्री उम्मेद सिंह रावत और मैंने कोशिश की पुनः खुले परन्तु जनता का छेत्र वासियों का साथ नहीं मिला खैर मित्रो
ललित पुर स्कूल
के भूतपूर्व प्रधानाचार्य
श्री विक्रम सिंह चौहान उनके
परम मित्र थे
कोई भी दुबिधा
हो सजवाण जी
उनसे राय लेना
नहीं भूलते थे
और डरते भी
थे . एक दूसरे
के प्रति सम्मान
और एक जैसे
निष्पक्षता दोनों की एक
जैसी थी अपने
पराये में भेदभाव
एक जैसा था
मुझे याद है जब
वह घर आते
थे तो सारे
गौं के छोटे
-बच्चे हमारे घर आते
थे क्यों की
ढेर सारे टाफी
हो या चना
मिश्री , बिस्कुट गट्टे लाते
थे जब तक
गौं रहते बच्चों
का जमवाड़ा लगा
रहता था . फिर
बड़े लोगों का
जमवाड़ा लगा रहता
था . हमारे गौं
में स्वर्गीय बच्ची
राम थे जो
उन्हें आदर्श मानते थे
और उनके क़दमों
पर चलकर गौं
हिट के कार्य
करते थे एक
तरफ से गाउँका
भर उनलोगों पर
ही था . सभी
उनका आदर करते
थे .घर गौं
की खबर के
बाद उनका ध्यान
स्कूल होया जनता
कॉलेज ललितपुर तुरंत
वहां की जानकारी
लेने वहां पहुँच
जाते थे और उच्च
शिक्षा कैसे हो प्रिंसिपल
श्री विक्रम
सिंह चौहान जी
से बिचार विमर्श
करते थे .अगर
न पहुंचे तो
. मालूम होने पर
चौहान जी
और भगत सिंह
गुरु जी सीली
तल्ली वाले आ कर
अवगत कराते थे
. सभी जानते हैं
गौं में बहुत
से ऐसे लोग
होते हैं जो
न करते हैं न
करने देते केवल
अपने गुरुर में
रहते हैं उनका
एक ही ध्येय
था ईमानदारी न
किसी को गलत
कार्य करने देते
थे .चाहे ब्लॉक
प्रमुख हो या
प्रधान . जानते है गौं
में शिक्षा के
आभाव में लोगों
को सरकारी योजनाओं
की जानकारी न
होने से प्रधान
कितना गवन कर
देते हैं , फिर
ईमानदार को
भड़काकर उनके खिलाप
कर देते हैं
जब वह जॉब
पर थे तो
उनको लगता था
कभी -२ गांव आएँगे
पर जब रिटायर
हुए तो प्रधान
को अपना हित
डंबाडोल लगने लगा
तो गौं वालोंको
भड़काने में कमी
नहीं की पर
कुछ ही लोग
होते हैं जो
उनके बहकावे में
आये पर महात्मा
जी ने अपना
इमां और गौं
हित में काम
जारी रखा और
एक दिन गौं
वालोंने ग्राम सभा का
प्रधान बना दिए
गए गौं का
काम ही सपोर्ट
रहा पर अन्य
गौं रानीहाट
तल्ला मल्ला और
मटकुण्डा जनता का
पूरा सपोर्ट मिला
जिससे निर्विरोध चुने
गए उन्होंने हर
कार्य ईमानदारी से
किया जिस्मे बैंक
.मुख्या था जो
लेकर ही आये
. गौं में कुछ
लोग ऐसे होते
हैं जो नहीं
चाहते ईमानदार आदमी
काम करे .कुछ
लोग उनको खटकने
लगे . और उनको
टारगेट करके इस
उम्मीद में की
यह टूट जाये
और दूसरीबार प्रधान
न बने उनको
इसकी चिंता नहीं
थी वह एक
समाजसेवी थे किसी
न किसी तरह
कार्य करते थे
परन्तु दुःख इस
बात का है
जिस गौं के
लिए इतना कुछ
किया अपना सारा
जीवन लगाया .अपने
पूंजी लगाया उस
गौं के कुछ
लोगों द्वारा उनको
ख़त्म करने का
सडयंत्र भी रचा
गया पर सफल
न हो सके
गौं में कुछ
अच्छे लोग भी
हैं जो बिरोध
किये उनका . दूसरे
गौं वाले उन्हें
सम्मान की नजर
से देखते है
आजतक परन्तु
गौं के लोगों
ने वह सम्मान
नहीं दिया .कहते
थे हमारे गौं
के बीच अच्छे लोगों
की कभी कदर
नहीं हो सकती
क्यों की अपना
कोई बजूद नहीं है
इनका काम तलवा
चेतना ही है
ऊपर उठ नहीं
सकते जो सही
भी था .
आज सम्मान की बात दूर कोई याद तक नहीं
करता .दुःख होता है जो पैसे वाले होते हैं उस और ही लोगों का झुकाव हो जाता है आज भी
वही है कब एक प्रथा से लोग चिपके रहेंगे कह नहीं सकते .उनका ईश्वर ही था कहते थे मेरे
साथ ईश्वर है तो मुझे कोई नहीं मर सकता सही भी कहा भयंकर सड़क दुर्घटना हुई टैक्सी नदी
में गिरी पर हमारे इस्ट्देव व् उस परमात्मा की कृपा से कुछ चोट के अलावा किसी का कुछ
नहीं बिगड़ा शान से कुछ सालों बाद देहांत हुआ
. परमात्मा उन की आत्मा को शांति दे . और उन्हें याद करता हूँ तो हर कार्य याद
आ जाते हैं उनके द्वारा किये और उन लोगों पर घृणा आती है जो कुचक्र चलते हैं एक महान
कर्मठ महान पुरुष के खिलाप .महान पुरुष जहाँ
भी हों उनको बार बार नमन और श्रद्धांजलि के साथ सलाम करता हूँ .
जय हिन्द जय छेत्र
रक्षक
दान सिंह रावत धौड़िया
स्व. श्री राजेसिंह रावत धौड़िया को समर्पित 



