शनिवार, 24 अगस्त 2019

काश ओ दिन लौट कर आते

                          काश ओ दिन लौट कर आते 
बचपन की यादें अक्सर याद आ  जाते  हैं
चलना सखी जब से ओ दिन याद आ जाते हैं
रोना ।हंसना रूठ जाना  कभी कभी अपनों से
उनका मनाना कभी मारना प्यारा लगता था

दा

थोड़ा बड़े क्या हुए शैतानी सुरु हो जाती थी
परेशां जब सब हो जाते ।गाली भी प्यारी थी
बचपन  की.........................
स्कूल कॉलेज की उम्र भी क्या गजब होती है
कितने दोस्त ।और दुश्मन बन जाते थे
इसमें भी प्यार होता था फिर गले लग जाते थे
याद करू उन लम्हों को आँखों से आँशु निकल जाते हैं
बक्चपन की यादें.................
विद्या एक नई दिशा का पैगाम देता है
बस दुःख इस बात है होता है जिससे लगाव होता है
अपने अपने भाग्य की खोज में निकल जाता है
बचपन अपना पन दिखता है सिखाता है
पर सच  मानो दिल पर एक घाव सा दे जाता है
बचपन .........................................
फिरू हर जगह पर ओ दिन फिर लौट कर शायद न आएगा
बस आश लगाए बैठते है बिछड़ा साथी कभी मिल जाएगा
बचपन ........................
 दान सिंह  धौड़िया रावत
उत्तराखण वाले

.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें