मंगलवार, 18 जुलाई 2017

अपरों की याद

जब याद  अपरू की आंद,भंडया सतां द 
मिलनाकु तड़प लगी रैन्द
जब इन आँखों प्यार मचलकी रुंद 
किंगोद्या कु दिल दुनिया भर कु गम डूब जांद 
हर बार मेरी जिकुड़ी घबरान्दि रैन्द 
जणू मेरी जान जानिसि रैन्द 
जब याद अपरून की आनद ,भंडया सतांद 
भैरे कनकैकी लोग अप्रु बगैर रैन्दे
दुःख अप्रु कु रोज सहन्दी 
कनु निस्फिकर से रैंदी 
हम थै रोज डर लगनद
कीलय निरबागि फुन्द्य भगन्द 
कखि हमसे* दूर हो जालु 
कैथै सोच्नु अप्रु मन की बतालु -- 
हर फूल याद खोया खोया है
लाग्नु रातभर बहुत रोया है 
जब ठंडरी कोयल गांद 
कैकी याद जरूर आनन्द 
जब गौं सब उठी जन्दी 
देखना कुन मन करन्द

जब याद अपरून की आनद ,भंडया सतांद
मिलनाकु तड़प लगी रैन्द   
जय उत्तराखंड।                                                                                   दानसिंह     धौडिया रावत             

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें