मंगलवार, 18 जुलाई 2017

pannon ki tadaf

मैं रहूँ या ना रहूँ तुम सब मुझे दिल में कहीं रखना 
मुझे नींद आये जो आखिरी तुम मुझे ख्वाबों में याद रखना 
बस इतना है तुमसे कहना.तुम सदा ख़ुश खुशहाल रहना 
मैं रहूँ या ना रहूँ तुम तुम सब मुझे दिल में कहीं रखना
किसी रोज़ बारीश जो आये समझ लेना बूंदों में मैं हूँ 
सुबह धुप तुमको सताए समझ लेना किरणों में हूँ 
हज़ार बार सोचा, कह दूँ तुम्हे पहाड़ छोड़ना 
अपने घर खेत खलियान से मुँह कभी मोडना 
हो तुम पहाड़ के दीपक उसे कभी बुझने देना 
जन्म भूमि छूट जाने का डर कभी दिल से गया ही नहीं 
देखा सब यह मंजर तो मुझसे देखा गया नहीं 
हवाओं में लिपटा हुआ शरीर है कब गुज़र जाऊँगा
जमी को छू लो सभी देखकर शायद मैं ठहर जाऊंगा 
शब्द मन में बिठा लो शायद मैं कभी याद जाऊंगा 
तुमको प्यार रहे पहाड़ से तो सब को रोक लेना 
तड़पते हैं बुजर्ग जो तुम्हारे बिना उन्हें संभाल लेना 
शिकायत करना . पत्थरों को तुम बाद में पूजना 
बक्त है अभी ,इंसान हैं अभी प्यार से उन्हें मन लेना 
मैं रहूँ या ना रहूँ तुम सब मुझे दिल में कहीं रखना 
मुझे नींद आये जो आखिरी तुम मुझे ख्वाबों में याद रखना 
बस इतना है तुमसे कहना.तुम सदा ख़ुश खुशहाल रहना 
मैं रहूँ या ना रहूँ तुम तुम सब मुझे दिल में कहीं रखना 
जय उत्तराखंड ,जय पहाड़ . जय देव भूमि

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें