गुरुवार, 25 जनवरी 2018

क्या मौसम हुयुं च

शुभ संध्या

शुभ संध्या. क्या मौसम हुयुं च .इन लाग्नु च  पहाड़ कु हर नदी जंगल घर  खेत इन बोना छी कि........

आ जावा रे आ जावा रे  आ जावा
 तुम्थे पुकारनु च तुमर घार
आ जावा मि त कब बाटी  देख्नु छु
क्य तुम्थे निच अप्रु पहाड़ से प्यार
देवों कु थान बना दये चाह म तुम्हारी
तुम्हारी खुशी म पहाड़ तुड़वा दी सारी
अब त चला आवा अप्रु पहाड़ म
आज मि हर  रोज देखूं राह तेरी
तुम ही बतावा क्या च खता मेरी
अब त चले आवा  तुम अप्रु घार
तुमतो चले आज सब जगह बीरान च
हर तरफ देखुंदू सब सुनशान हुयुं च
आ जावा रे आ जावा रे  आ जावा
तुम्थे पुकारनु च तुमर घार
इतका सालों दुःख कुई सह नि सकालु
प्यार प्रेम  खेत खल्यान कैकु त हवालु
याद रख्या कुई अपरी जन्म भूमि छोड़ नि सकंदु
जब घिरलय मुसीबतम कुई त अप्रु घर म लुकुन्द
मी से च बैर त अप्रु थै कीलय तड़फ-२ मर्दवा
कसम छी तुम थै अप्रु पहाड़ जल्दी आ जावा 
आख्रिरी बक्त च क्य मेरी भी सुनणा छावा
क्या मौसम हुयुंच यखा कु नजारा देख जावा 
घार आ जावा एक बार
हर कठनाई मिटा देउला
अप्रु पहाड़  थै फिर  स्वर्ग बनुला
आ जावा रे आ जावा रे  आ जावा
तुम्थे पुकारनु च तुमर घार
आ जावा मि त कब बाटी  देख्नु छु
क्य तुम्थे निच अप्रु पहाड़ से प्यार .

जय हमरु  पहाड़  जय देव भूमि






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