बाली गिरी रे
इ बोई
बाली गिरी रे बांका
को बाजार म
बाली गिरि रे
गिरि रे
ये बोई ये
बब्बा ये बोई ये
बब्बा ................
सैंयाँ आये बुड्या
आये घार म
लुक लुकीके
बोले बाली मि
पहना दिऊलू आजा
निरबागि छोरी
मि बोली न
न न न बाबा न
करा जोरा जोरी
मुंड भी
फवड फिर भी
निरबाग़िल हथ नि
छोड़ी
इ माँ हथ
जरा भी नि
छोड़ी
फिर इन
न पुछया कय
ह्वै. हाई रे
फिर बाली गिरि
रे हमरू
तकरार
बाली गिरि ये
बांका को बाजार
म
कुड़ी कु छज्जा
म मी खड़ी
थाड़ म बुड्या
दिल जानी
दाँत दिखाकि बोले मुड
आ जा मेरी
मुखड़ी घर्या रानी
फूंदा दे अपरी
या दे बुलाक
की निशाणी
छज्जा कु किनर
बाटी शर्म से
मि हो गींउ
पाणी पाणी
ये बोई हो
गिओन पाणी पाणी
इनु ह्वै दया
दैया फिर बाली
गिरो ये हम
द्विकु एक प्यार
में
पुन्गडी म मेरु
सजना ने मेरु उलझी
धोती सुलझाई
-2
थामिक मेरी पगड़ी
बोलि निरबागि तू
मेरु मन भ
आंख देखाकि मि कुछ
नि बोलि .
कुछ नि बोलि
मि बबरे बबरे
बबरे
आँख दिखाके फिर सर
झुकाके जरा मुस्कराई
बुड्या ने जब
छ्याङ मेथे त
फिर होग्य हाथापाई
हाई बुबरै फिर होइ
ग्याई हाथापाई ........
अब न बोल्या
क्या
बाली गिरि रे क्या
बोलू अब बेकार
म
बाली गिरि रे बांका
कु बाजार
म


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