मंगलवार, 22 मई 2018

कु बजालु मुरुली हो हो मेरो पहाड़ म


मित्रो मि कुई कवि निछों .एक गाना  एक गाना सुनिकी मन आई कि मि भी ये पर ही अलग लिख देऊ   भलु लागल  शुक्रिया बोल्या नथर गलती कण माफ़ करय कोशिश  कै गाना कि पर कांडा  लगन्या गैली ठीक निच माफ़ करय हो -----------



कु बजालु मुरुली हो हो मेरो पहाड़  
कु बजालु ..................
गदना का ढूँगी डांडा का छोडु
पुंगडियो कु मुंडेरी  कु बजालु मुरुली हो हो
मेरु पहाड़ ....
मुरली की धुन सुनी की घसेरी रुकदा छाया
पन्देरी भूली जांद छाया ग गगरी पाणी कु  लींदा  छाया।        हो हो मेरु पहाड़
कु बजाणु हवालु हो हो हो मुरली पहाड़
कु बजालु ........
जैकी धुन सुनिक गोर लौटी जांद छाया
अब कख गवाला गोर हवाला हो हो हो                           हमरु  पहाड़ का।                                                  छनी  गुटरी कनु सुनशान होई ग्याई हो हो।                       हमरु पहाड़ म 
चखुली कु चिकचाट गोरु कु रमराट 
कैकी नजर लाग हो हो हमरु पहाड़
कु बजालु ........
दथुड़ी कु चमचाट बेटी बौड़िओं कु लैब राट
कख अब गवला भग्यान हो  हो पहाड़ छोड़िक 
कु बजालु .............
कीलय छावा हम अनजान हो हो अप्रु पहाड़ से
कु बचालु हो हो हो हमरु पहाड़ थै
स्वाचा म्यरा भाई बन्दों घार तुम आवा
ये पहाड़ थै ही हो हो हो स्वर्ग तुम  बना दो
सुखी .हारु  हारु हवालु हो हो हो हमरु  पहाड़ हो
फिर सुनाई दयालु हो हो लोगो मुरली की धुन हो
कु बजालू ................
 जय पहाड़  देवभूमि                                                      दानसिंह धौडिया  रावत                                             रशिया महादेव 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें